Thursday, January 18, 2018

डायरी 2017 की (Diary of 2017)

मेरा नाम ‘रोहित कल्याणा’ है और क्रेजी लोगों में ‘बाबा’ नाम से फेमस हूँ । पिछले कई सालों से पहाड़ों में पाया जाता हूँ मुख्यत: 2013 के बाद से । 2017 गुजर चुका है, सोच रहा हूँ आज इसका पिंड दान कर दूं इस पोस्ट के द्वारा । 2017 की मुख्य उपलब्धियां थी : 4231 रूपये खर्च करके कुल 59 दिन घुमक्कड़ी जिसमें 357 किमी. ट्रैकिंग, 5400 मी. पर कैम्पिंग, 17 दर्रे (माउंटेन पास) और 10 पर्वतीय झीलें के दर्शन शामिल हैं । 

Sunday, January 14, 2018

झलकियाँ बलेनी की (Glimpses of Baleni)

पिछले भागों में आपने पढ़ा कि कैसे हमने बीड़ से धर्मशाला पहुंचकर वहां से बलेनी पास की ओर अपनी यात्रा शुरू करी । किसी ज़माने में चित्रहार आता था जिसमें टॉप 10 गानों दिखाए जाते थे और हर बार टॉप गाने से पहले पिछले 9 गानों की झलकियाँ पेश की जाती थी सैम टू सैम वही मैं करने वाला हूँ । फर्क इतना है कि मैं यहाँ इस ट्रेक के फोटो पेश करूंगा बाकी आपकी मर्जी है कि कौनसा नम्बर वन है 

Saturday, January 13, 2018

बलेनी पास : टपरियों का ट्रैक, बलेनी बेस कैंप - सल्ली (Baleni Pass : The trek of huts, Baleni Base Camp - Salli)

1 जनवरी 2018
चंद्रेला माता मंदिर से चलकर बलेनी पास के बेस तक पहुंच गये । हम चार लोग एक शानदार टपरी में हैं । यह नए साल की रात है । अगले दिन खीर बनाकर चारों ने गर्मजोशी से नए साल का स्वागत किया । बाहर बर्फ है आगे और भी ज्यादा बर्फ है । दोपहर 2 बजे वापस चलना शुरू किया यह सोचकर की 3-4 बजे तक सल्ली पहुंच जायेंगे । जैसे ही अंदर पैकिंग शुरू हुई वैसे ही बाहर बर्फ गिरने लगी । “हैप्पी न्यू ईयर”

Wednesday, January 10, 2018

बलेनी पास : टपरियों का ट्रैक, सल्ली - बलेनी बेस कैंप (Baleni Pass : The trek of huts, Salli-Base Camp)

30 दिसम्बर 2017
20 दिसम्बर 2017 को ‘प्लान’ पैदा हुआ “घूमने जाना है घूमने जाना है बोलते हुए” । रोना रोकने के लिए इसको बोलना पड़ा कि "तेरी माँ करेरी झील पर है", 25 तक प्लान का झुनझुना ‘सरी जोत’ पर लगे त्रिशूल पर लटक गया (रोना और हगना अभी भी कायम है), 27 को कार्टूनिस्ट साहब ने प्लान को फिर से करेरी लेक में कूदा दिया वो भी डाईपर समेत (मरते मरते बचा), और अंत में 28 को जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही प्लान को “माँ बलेनी” के हवाले कर दिया । स्वाहा:

Thursday, December 28, 2017

कैम्पिंग ऐट हनुमानगढ़ पीक इन विंटर (Camping at Hanumangarh peak in winter)

21 दिसम्बर 2017
साल जा रहा है, कैलेंडर पर नंबर बदलने वाला है । लोगों ने 4 अंकों (2017) के साथ कुछ को चिपका दिया है । जिन्दगी कैद हो गई है 365 दिनों में, जिसकी कलाइयों पर सोमवार से शुक्रवार की बेड़ियाँ बंधी हैं । जब भी निराश होती है तो शनिवार और इतवार का ठुल्लू पकड़ा देते हैं । जिन्दगी बेजुबान क्या हुई हमने उसे जानवर ही समझ लिया । आज की फिलोसफी समाप्त हुई चलो हर दिन को नया साल बनाएं ।

Wednesday, December 27, 2017

हनुमानगढ़ चोटी : ये ना हो पायेगा (Hanumangarh Peak : English mein kya kahenge??)

14 दिसम्बर 2017
हिमाचली सर्दियों ने हिमालय के आँगन में दस्तक दे दी है वो भी सूखी वाली । अक्टूबर से राह देख रहे हैं कि कब पहाड़ों पर सर्दियों का चिट्टा रंग चढ़ेगा ? । 10 नवम्बर को एक्युवेदर ने बताया कि अगले हफ्ते बारिश और बर्फ का योग है तो “आँखें ऐसे चमकने लगी जैसे किसी ने अपने हजार बीट-कोइन मेरे नाम कर दिए हो” ।

Tuesday, December 26, 2017

बैजनाथ के टिक्की-समोसे (Tikki-samosa of Baijnath)

26 दिसम्बर 2017
जून में बिजली गिरी थी बी.एस.एन.एल. के मोडम पर । वैसे तो इससे पहले भी कई बार गिरी थी और हर बार श्रीमती बिजली देवी ने किसी-न-किसी को भस्म किया । घर के तमाम इलेक्ट्रोनिक गैजेटस में से सबसे ज्यादा प्यारा उसे बी.एस.एन.एल. का मोडम लगा जिसको न जाने उसने बिजली मारकर कितनी ही बार धुआं-धुआं किया ।

Monday, November 27, 2017

पिन पार्वती पास से अंजान कोल : अंजान कोल-मनाली (Pin Parvati Pass to Unknown col : Unknown Col-Manali)

2 सितम्बर 2017
अंजान कोल ताजा बर्फ में डूबा है । सूरज ने निकलते ही आधी परेशानी हल कर दी । अपनी जान हथेली पर रखकर सुरक्षित बेस कैंप पहुंचने का सपना है । टी-शर्ट से दोनों को बांधकर लांधने लगे गहरी और छिपी क्रेवासों को । कोई तो था जो हमें बचाना चाहता था, हर पल यह एहसास बढ़ता ही जा रहा था । यात्रा दो लोगों की जो पार्वती ग्लेशियर पर फंसे और सकुशल नीचे उतरने में भी कामयाब रहे । शरीर को सुरक्षित देखना त्यौहार से कम नहीं है ।

Friday, November 17, 2017

पिन पार्वती पास से अंजान कोल : मानतलाई झील-पार्वती ग्लेशियर-अंजान कोल (Pin Parvati Pass to Unknown col : Mantalai Lake-Parvati Glacier-Unknown Col)

28 अगस्त 2017
मानतलाई से जब रास्ता पिन पार्वती पास की ओर चढ़ता है तब वहां की जमीन दिखाती है 7 से ज्यादा पर्वतों के शिखर । पार्वती ग्लेशियर के गर्भ से झांकती 10 से भी ज्यादा झीलें जो हिमालय के मुकुट में जड़ी मणियों जैसी चमकती हैं । गलत कॉर्डिनेट्स और गलत दिशा में जाते पैरों के निशानों का पीछा करते-करते हम जहां पहुंचे वहां दिल दहल गया । यह कोल है पिन पार्वती पास नहीं है । अपनी मंजिल 5319 मी. थी 5400 मी. नही । हम फंस गयें हैं अकेले, क्रेवास, मौलिन और बर्फ़बारी के बीच ।

Sunday, November 12, 2017

पिन पार्वती पास से अंजान कोल : टुंडा भुज-उड़ी थाच-मानतलाई झील (Pin Parvati Pass to Unknown col : Tunda Bhuj-Udi Thach-Mantalai Lake)

27 अगस्त 2017
रात अच्छी व गर्म बीती । सूरज के साथ-साथ हम भी अपने काम पर लग गये । रात काफी ओस गिरी थी जिसने टेंट को बाहर क्या भीतर से भी नहीं छोड़ा । स्लीपिंग बैग के बाद टेंट पैक करके बैग में डाल लिया । नूपुर ने चाय तैयार कर दी । मौसम विभाग टीम के “आल द बेस्ट” के बदले हमने थैंक यू बोला । आज उड़ी थाच रुकने का प्लान है । दूसरे ग्रुप की भी वहीं डेरा डालने की मंशा है ।  तो चलो शुरू करते हैं आज का सफ़र पार्वती घाटी में ।