Tuesday, September 17, 2019

पिन पार्वती पास ट्रेक (Pin Parvati Pass Trek)

31-जुलाई-2019
कसोल से चलकर सर पास पहले ही क्रोस किया जा चुका है, लगातार 2 दिन चलते हुए हम दो लोग मानतलाई झील पहुंचे जहाँ गद्दी न मिलने पर भूखे ही सोना पड़ाता है । आगे बड़ा ग्लेशियर है, कमर तक गहरे नाले हैं और ऊपर से तेज बारिश है । भारी ठण्ड और भूख के बीच हम पार्वती के महा ग्लेशियर को पार करके पिन पार्वती पास पहुंचते हैं जहाँ से आगे का समस्त रास्ता ग्लेशियर में दबा है । पार्वती के बाद पिन नदी रास्ता रोकती है, जानें आगे की कहानी ।

Thursday, September 12, 2019

मानतलाई झील: सर पास से पिन पार्वती पास ट्रेक (Mantalai Lake: Sar Pass to Pin Parvati Pass Trek)

30-जुलाई-2019
पार्वती घाटी में तीनों का यह चौथा दिन है, सर पास की अपार सफलता के बाद टीम के हौसले बुलंद है लेकिन एक कोमरेड के विद्रोह के बाद टीम पर मानसिक आघात होता है । एक कोमरेड गद्दार की उपाधि ग्रहण करके बर्शेनी से जम्मू निकल गया जबकि बाकि दोनों ने पार्वती घाटी को साक्षी मानकर पिन पार्वती पास को पार करने की शपथ ग्रहण करी । तो चलिए जानते हैं कि कैसे दो लोग बर्शेनी से मुद पहुंचे वाया पिन पार्वती पास ।

Tuesday, September 3, 2019

सर पास से पिन पार्वती पास ट्रेक (Sar Pass to Pin Parvati Pass Trek)

25 जुलाई 2019
घूमने के लिए पूरी दूनिया पड़ी है और हमने भी विचारों की दूनिया में समस्त गैलेक्सी घूमने के बाद तय किया कि “चलो सर पास”। जम्मू से पुराने साथ अरुण जसरोटिया और नारकंडा से अति प्राचीन साथी नवीन जोगटा के साथ भारी मानसून के बीच हम तीनों ने पहली बार सर पास पार किया । चलो शुरू करते हैं भारी बारिश और भारी बैगों से टूटती कमर और टांगों की कहानी ।

Monday, July 8, 2019

किस्से जालसू पास के (Stories Of Jalsu Pass)


धौलाधार पर्वत श्रृंखला में जालसू पास को अन्य पासों की तुलना में एक आसान ट्रेक माना जाता है । इस पास का इस्तेमाल बैजनाथ से मणिमहेश कैलाश तक पहुंचने के लिए किया जाता है । वैसे तो स्थानीय पपरोला से नयाग्राम तक भी इसका इस्तेमाल करते हैं, मतलब यह पास काँगड़ा को चंबा से जोड़ता है । हम तीन लोगों ने अक्तूबर महीने में जालसू से मणिमहेश कैलाश के दर्शन किये ।

Saturday, November 17, 2018

31 घंटे में फ्रेंडशिप पीक समिट (5194 मी.) Friendship peak summit (5194 m) in 31 hours

27 अक्टूबर 2018
पीर-पंजाल माउंटेन रेंज की गोद में पली-बढ़ी एक बेहद मशहूर चोटी “फ्रेंडशिप पीक” है, इसकी ऊँचाई “इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन” के हिसाब से 5289 मीटर है और यह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू डिस्ट्रिक्ट की अति फेमस घाटी “सोलांग” में स्थित है । आईये जानते है इस पीक के बारें में जिसने इतने कम समय में “नॉन-टेक्निकल पीक” व “ट्रैकिंग पीक” जैसी बड़ी-बड़ी उपाधियां अपने नाम कर ली । 

Tuesday, November 6, 2018

आखिरी मुलाकात हनुमानगढ़ के साथ (Last Encounter with Hanumangarh)

पिछले कल से पहले सम्पूर्ण हिमालय ने दिवाली की ख़ुशी में नया शाल ओढ़ लिया है । अब आप 3000 मीटर पर जाओ और धूप में नहाते हुए पर्वतों की शोभा देखो । वैसे तो हनुमानगढ़ मैं पहले भी बहुत बार जा चुका हूँ लेकिन इस बार अलग होने वाला हैं ।

Friday, September 21, 2018

माउंट यूनम : खेल-खेल में चढ़ो 6092 मीटर (Mount Yunam : Happy hiking to 6092 meter)

2-जुलाई-2018
स्टोक कांगड़ी चढ़ने का नशा ज्यादा देर न टिक सका, लेह में 1200 के कमरे ने सरेआम “नरक में जाओगे सब” बोलने पर मजबूर कर दिया । हमारे पास दो ख़बरें थी, खुशख़बरी के अंडर लेह से मनाली बस का टिकट 640 रु. प्रति व्यक्ति है और दुखखबरी के  मुताबिक अगले दो दिन बस की सीटें फुल हैं । ‘नेहा स्वीट्स’ की जलेबी व ‘फ़ूड कॉर्नर’ के लाइम सोडे ने इन ‘टू डेज’ को ‘ब’ से बेहतरीन बना दिया ।

Friday, September 7, 2018

बुद्धिष्ट और हिन्दुओं की आस्था का संगम "मचैल यात्रा" (Confluence of Buddhas and Hindus faith "Machail Yatra")


मचैल यात्रा हर साल अगस्त में शुरू होती है । मचैल मंदिर हिन्दू देवी दुर्गा को समर्पित है और जम्मू-कश्मीर राज्य की किश्तवाड़ डिस्ट्रिक में स्थित है, यहां की ऊँचाई 2958 मी. है । पाडर घाटी और चेनाब की सुन्दरता में पल रहे इस स्थान की सुन्दरता को शब्दों में ब्यान कर पाना असम्भव है । एक तरफ यह घाटी नीलम की खदानों के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी और बेतहाशा सुंदर ट्रैकों का कोई तोड़ नहीं ।

Thursday, August 2, 2018

छह हजारी बनने का सफर : स्टोक बेस कैंप-समिट-लेह (Story Of 'The First Summit' : Stok Base Camp-Summit-Leh)

27 जून 2018
पहली बार 6000 मी. पर पहुंचने की चाहत देश की अर्थव्यवस्था की तरह खतरे में पड़ गई । रात से हो रही बारिश व बर्फबारी ने स्थिति को पेचीदा बना दिया । खराब मौसम को देखते हुआ बागी-4 ने आज जाना अवॉयड कर दिया, गौरव के सिरदर्द ने उसे समिट से रोक लिया, नूपुर की उखड़ती सांसों ने उसे वापस लौटने पर मजबूर कर दिया । रास्ते की जीरो जानकारी और खराब मौसम को नजरंदाज करते हुए मैं अकेला ही आगे बढ़ गया, बिना सोचे-समझे कि परिणाम क्या होंगे । 

Sunday, July 29, 2018

छह हजारी बनने का सफर : स्टोक गांव-स्टोक बेस कैंप (Story Of 'The First Summit' : Stok Village-Stok Base Camp)

25 जून 2018
2010 तक मैं ट्रेकिंग का केजरीवाल था, उसे राजनीति की और मुझे पहाड़ों की जानकारी न के बराबर थी । 2018 में देखता हूं तो हाल वैसा ही है, भयानक ऐज दिल्ली का वेदर । 2013 में ख्याल आया कि मैं भी पहाड़ चढूंगा, समिट करूंगा । 5 साल तक हर पहाड़ से हिम्मत मांगी और जब हिम्मत आई तब एकसाथ 2 चोटियां फतेह हुई, स्टोक कांगडी (6130 मी.) और माउंट यूनम पीक (6093 मी.) । जानते है छह हजारी बनने की विधि ।