घूम तो सब रहे हैं, कोई ख्यालों में, कोई सोशल मिडिया पर तो कोई कुदरत की बनाई इस धरती पर । मैं भी इसी कड़ी का एक हिस्सा बनकर पिछले कुछ सालों से यहाँ-वहां भटक रहा हूँ जिसपर कुछ लोगो का बोलता है “जिन्दगी जी रहा है”, तो वहीं कुछ का टोकना है “जिन्दगी बर्बाद कर रहा है” । इस पोस्ट में आप जानोगे कि साल 2019 में अपुन कहाँ-कहाँ तफरीबाजी करता रहा ।
1. कुर्ग, कर्नाटक (28 दिसम्बर से 2018 से 8 जनवरी 2019)
2018 खत्म भी नही हुआ था कि अपनी गाड़ी पहले ही नार्थ इंडिया को छोड़कर साउथ इंडियन में रवाना हो गयी । कुर्ग में अपना काम एक ट्रेल रेस के लिए रूट बनाने का था, मैं वहाँ के एक स्थायी रनर के साथ कुर्ग के आसपास के इलाके में खूब घूमा । हमने कर्नाटक की सबसे ऊँची चोटी जिसका नाम है तड़ीअंडा मोल पीक को समिट किया, जिसकी ऊँचाई 1748 मीटर रही । कॉफ़ी एस्टेट्स में घुमने के अलावा हमने चौमाकुंद चोटी, कब्बे मॉटे आदि छोटे पहाड़ों को भी चढ़ा । यहाँ 11 दिन रुककर मैंने 87.27 किमी. की ट्रेकिंग करी जिसमें 4660 मीटर का कुल एलेवेश्न गेन शामिल है ।
2. सहाद्री पर्वत श्रृंखला, महाराष्ट्र (9 जनवरी 2019 से 23 फरवरी 2019)
लाइफ में पहली बार मैं सहाद्री पर्वत श्रृंखला में खड़ा था, यहाँ मैं खूब घूमा और लगभग 46 दिन उधर ही बिताये । यहाँ घूमते हुए अपुन महाराष्ट्र की सबसे ऊँची चोटी ‘कल्सुबाई’ कई बार चढ़ा, आगे फिर रतनगड किल्ला, अलंग-मदन-कुलंग का बेस, सांदन वैली, हरिश्चंद्रगड, कोंकण कड़ा, पाबरगड और भंडारदारा भी कई बार घूमना हुआ । इसके अलावा पुणे, मुंबई, शेंडी, अकोले, नासिक और इगतपुरी घूमना भी मजेदार अनुभव रहा । सहाद्री रेंज में रहते हुए अपुन ने टोटल 164 किमी. की पैदल ट्रेकिंग करी जिसमें 19542 मीटर का एलेवेश्न गेन हुआ ।
3. नाग टिब्बा, उत्तराखंड (24 फरवरी से 27 फरवरी 2019)
वेस्ट इंडिया से नार्थ इंडिया पहुंचते ही सीधा कूच किया गया विंटर ट्रेक के लिए । अब तक वंडरलास्टियों ने सोशल मिडिया को अपने काबू में कर लिया था, बार-बार लगातार बर्फ के फोटो डालकर । अपुन भी इस ‘फोटो-स्ट्राइक’ में आहुति डालने हेतु निकल पड़े नाग टिब्बा के लिए । गाड़ी से चलते हुए हम पांच लोग पहले ही दिन पन्त्वाडी पहुंचे जहाँ से चलते हुए हमने गोट विलेज से ऊपर कैम्पिंग करी और अगले दिन हममे से कुछ लोग झंडी टॉप तक गये तो कुछ सिर्फ नाग मंदिर तक । टोटल ट्रेकिंग 18 किमी. हुई 1005 मीटर के ओवेरल गेन के साथ ।
4. भरमौर, हिमाचल प्रदेश (31 मार्च से 03 अप्रैल 2019)
नाग टिब्बे से वापस आकर कपड़े धोये ही थे कि भरमौर जाना पड़ा, उधर अरविन्द कार्टूनिस्ट जी पिछले कई महीनों से स्थापित थे । हम भी पहुंच गये उनसे मिलने, वहाँ अभी भी बर्फ थी और मौसम बेहद ही ठंडा था । हम भरमौर के बाद कुगती गाँव के लिए भी निकले लेकिन रास्ता ठीक न होने के कारण वापस आना पड़ा । रास्ते से मणिमहेश कैलाश के दर्शन करना यात्रा की बड़ी उपलब्धि रही । भरमौर से बीड पहुंचे वाया धर्मशाला, एक रात बीड में बिताकर हमने 3 अप्रैल को जिला फरीदाबाद वापसी करी । इस ट्रिप पर कोई ट्रेकिंग नहीं करी, बस गाड़ी में अरे-परे घूमते रहे ।
5. संदकफू, वेस्ट बंगाल (11 अप्रैल से 18 अप्रैल 2019)
तत्काल में ट्रेन के टिकेट बुक हुए और पहुंच गये रिम्बिक जोकि वेस्ट बंगाल का हिस्सा है । यहाँ मैं सात दिन रहा और आसपास के इलाके में घूमता रहा । यहाँ रहते हुए फेमस संदकफू, फालूट, मानेभंजन आदि जगहों के साथ-साथ एक नेपाली शादी अटेंड करने का सुनहरा मौका भी मिला । मैं मदिरापान तो नहीं करता लेकिन शादी में बुरांश की शराब को जूस समझने की भूल के कारण एक घंटे तक बावला होकर जरुर फिरता रहा । इधर 66.7 किमी. का ट्रेक किया जिसमें 6750 मीटर का टोटल एलेवेश्न गेन हुआ ।
6. बीड-बिलिंग, हिमाचल प्रदेश (19 अप्रैल से 21 अप्रैल 2019)
बीड में होने वाली एक रोड रेस के लिए मुझे हिमाचल वापस आना पड़ा रिम्बिक को छोड़कर । यहाँ बीड, लैंडिंग साईट, बिलिंग, शेराबिलिंग मोनस्ट्री आदि घूमने के बाद वापसी आना हुआ । यहाँ सिर्फ 7 किमी. ही ट्रेक किया जिसमें मात्र 150 मीटर का गेन हुआ ।
7. संदकफू, वेस्ट बंगाल (03 मई से 15 मई 2019)
एक बार फिर से हम रिम्बिक की धरती पर खड़े थे, इधर न्यू जलपाई गुडी में उतरते ही टेक्सी वाले बिल्कुल दिल्ली के ऑटो वाला व्यवहार करते हैं, मतलब ट्रेन से उतरने से पहले ही आपको कैप्चर कर लेंगे । खैर न्यू जलपाई गुडी से दार्जिंलिंग पहुंचे सूमो से फिर एक और टैक्सी से रिम्बिक । कुछ 12 दिन यहाँ बिताये जिसमें फिर से संदकफू और फालूट घूमना हुआ । इस जगह को मैं बहुत याद करता हूँ, यहाँ के लोग शिक्षित हैं इसलिए पर्यावरण और प्लास्टिक का खूब ख्याल रखते हैं, जगह-जगह डस्टबिन स्थापित किये गये हैं । तो यहाँ 68.7 किमी. की ट्रेकिंग करी 8714 मीटर के एलेवेश्न गेन के साथ ।
8. सांगला-छितकुल और जीभी, हिमाचल प्रदेश (17 मई से 01 जून 2019)
ये 15 दिन हमेशा याद रहेंगे, इन दिनों अपुन ने कुछ नहीं किया । सुबह देर से उठना और दो-एक किमी. का ट्रैक बस यही दिनचर्या रही 15 दिन की । जहाँ दिल्ली एन.सी.आर. 47-48 डिग्री में तप रहा था वहीँ हिमाचल ने कलेजे में ठंडक पहुंचाई । पहले तो मैं सांगला रुका जहाँ, कामरू किला, बेरिंग मंदिर, आजाद कश्मीर, और ट्राउट फिश फॉर्म घूमा, फिर अलगे कुछ दिन छितकुल में बिताये जहाँ रोज सवेरे बास्पा नदी के किनारे जाकर बैठना हमेशा याद रहेगा । कमरे के पीछे ही चारंग ला था दीवार के माफिक, अपुन रोज देखता और बोलता कि एक दिन जरुर आयेगा तेरे पास । ऐसा ही एक वादा सांगला में लिया गया “कि इधर पैदल आयेगा रुपिन पास होते हुए” । यहाँ से निकलकर सीधा आनी और फिर जीभी में कई दिन बिताये । चेह्णी कोठी को पहली बार सामने देखकर बहुत सुकून मिला । इस ट्रिप पर मात्र 30 किमी. की ट्रैकिंग हुई जिसमें 3575 मीटर का गेन हुआ ।
9. मनाली-लेह (14 जून से 26 जून 2019)
यह हेल रेस का सालाना रोड रनिंग इवेंट था जिसमें कुछ धावक मनाली मॉल रोड से लेह स्थित शांति स्तूप तक भागे । धावकों ने 480 किमी. की दूरी को तय समय जोकि 120 घंटे था से पूरे 7 घंटे पहले पूरा कर लिया । इस इवेंट के दौरान हमने कुछ दिन सोलंग घाटी में बिताये, बाकी मनाली-लेह हाईवे पर । इस हाईवे के बारें में क्या बताना सब तो जानते ही हो आप लोग । फिर भी इस इवेंट के दौरान रोहतांग पास, बारालाच्च्ला, गाटा लूप्स, नकी ला, लाचुंग ला, मौरे प्लेन्स और तांगलंग ला और शांति स्तूप घूमने का अवसर मिला । इधर अपन टोटल 21 किमी. चला, गेन कितना हुआ कोई आईडिया नहीं है । सारे गेजेट बंद थे इसलिए कोई रिकॉर्डिंग नहीं हुई ।
10. भृगु लेक, हिमाचल प्रदेश (20 जुलाई से 20 जुलाई 2019)
यह एक तेज प्रयास था भृगु झील जाने का । कई दिनों से लगातार होती बारिश ने इस ट्रिप को बहुत ही बेरंग सा कर दिया था । मुझे लग रहा था कि अगर ऐसे ही मौसम बना रहा तो लाइफ में पहली बार भृगु जाना कैंसल हो सकता है लेकिन शुक्र था कि एक दिन धूप निकली । बस पैरों में बूट पहनकर शूटम-शूट भृगु झील गये और उसी दिन वापस नीचे भी आ गये । तो 42 किमी. का ट्रेक हुआ टोटल मिलाकर जिसमें 5023 मीटर का कुल गेन हुआ । पूरा ब्लॉग पढने के लिए यहाँ क्लिक करें ।
11. सर पास व पिन पार्वती पास, हिमाचल प्रदेश (24 जुलाई से 04 अगस्त 2019)
साल 2019 का सबसे रोमांचक ट्रेक था यह, वैसे से मैंने पहले भी एक अटेम्प्ट किया था पिन पार्वती पास का लेकिन कामयाब नहीं हो पाया । इस दूसरे प्रयास में सर पास तक हम तीन लोग थे और पिन पार्वती पास मिशन के लिए सिर्फ दो । मैंने और नवीन ने जवानी के जोश में अकेले ही पार्वती से पिन वैली को पैदल ही नाप डाला । वैसे तो ये दोनों ही घाटियाँ रोमांच और खतरों से भरी पड़ी हैं फिर भी हम जैसे-तैसे कामयाब हो ही गये । नोट : इस ट्रेक पर अकेले जाना लगभग नामुमकिन है । टोटल ट्रेक की दूरी 121 किमी. रही जिसमें 7882 मीटर का एलेवेश्न गेन हुआ । फेल्ड अटेम्प्ट यहाँ पढ़े व सफल अटेम्प्ट यहाँ पढ़े ।
12. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (26 अगस्त से 31 अगस्त 2019)
अगस्त का महिना था फरीदाबाद जल रहा था और राजस्थान जाना गर्म तवे पर चलने जैसा था । पहले हम जोधपुर गये जहाँ से जैसलमेर और फिर लौंगेवाला में एक भयानक रात बिताकर वापसी हुई । हेल रेस के इवेंट के चलते हमारा जाना हुआ, जैसलमेर तक सब ठीक था लेकिन लौंगेवाला में आर्मी गेस्ट हाउस में रात इतनी गर्म थी जिसका सबूत वो अंडरवियर दे सकता है जिससे लगातार 10 बार पसीनों को निचौडा गया । यहाँ कोई ट्रेकिंग नहीं हुई, अगर होती तो हमें भी शहीद की उपाधि मिलना तय था ।
13. त्रियुंड हिल, हिमाचल प्रदेश (18 सितम्बर से 19 सितम्बर 2019)
फरीदाबाद के कारखाने जल थे, पूरे जिले का वातावरण लूमय था । मौका मिलते ही मैं और विश्वास हिमाचल निकल गये जहाँ हमने त्रियुंड ट्रेक किया । मौसम साफ था और यह ऐसा ट्रेक है कि त्रियुंड पहुंचते ही धौलाधार एकदम सामने दिखती है, इतनी सामने की बात कर लो उससे । ट्रेक की सफलता में हमने तय किया कि बीड चलते हैं और हनुमानगढ़ पीक को समिट करते हैं । त्रियुंड ट्रेक पर 8.69 किमी. का ट्रेक हुआ विद 973 मीटर गेन । पूरा एडवेंचर यहाँ पढ़ें ।
14. हनुमानगढ़ पीक, हिमाचल प्रदेश (19 सितम्बर से 21 सितम्बर 2019)
यहाँ एक दोस्त रहता है प्रत्युष नाम से, उसी के पास रुके । एक रात बिताकर अगले दिन हम तीन हलकी सर्दी के बीच निकल गये अति कम फेमस पीक के लिए । हमने बीड स्थित ‘गाँव बाड़ी’ से पैदल जाना तय किया । पूरा रास्ता एक प्रकार से टेक्निकल श्रेणी में रखा जा सकता है, रास्ते पर जौंख थी, कीचड़ और फिसलन के साथ-साथ धुंध, ओले और तेज बारिश ने हमारी देहि तोड़ डाली । ऊपर पहुंचकर खराब मौसम मिला इसलिए हमने नजारे के नाम पर बस एक ही शब्द सूझा “भागो” । टोटल 11.56 मीटर ट्रेकिंग हुई जिसमें 1604 मीटर का कुल एलेवेश्न गेन हुआ । पूरा ब्लॉग यहाँ है ।
15. सोलंग घाटी, हिमाचल प्रदेश (22 सितम्बर से 08 अक्टूबर 2019)
हेल रेस का एक और इवेंट था, सोलंग सकईअल्ट्रा । इस बार भी अपुन उधर था हेल्प के लिए । इधर हमने लगातार कई दिनों तक बारिश के बीच रूट को मार्क किया और हर रोज ही बारिश ने हमारी मेहनत को धो डाला । इस इवेंट के दौरान मनाली, हिडिम्बा मन्दिर, सोलंग वैली, अंजनी महादेव, बक्करथाच, वशिष्ठ मंदिर, गुलाबा आदि जगहें घूमने को मिली । 16 दिनों में यहाँ 84.19 किमी. की ट्रेकिंग करी जिसमें 6417 मीटर का टोटल गेन हुआ ।
16. काशी विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश (11 नवम्बर से 14 नवम्बर 2019)
काफी समय से माँ बोले जा रही थी कि “काशी घूमा ला, काशी घुमा ला”, तो आखिर एक दिन अपन ने काशी के नाम का कफन बाँध ही लिया । तत्काल में टिकट बुक करे और मम्मी-पापा को संग लेकर निकल पड़े बनारस । उधर ट्रेन से उतरकर सबसे पहला काम जो किया वो था कमरा लेना । बाद में गंगा में स्नान करके अगला मुख्य काम था भगवान विश्वनाथ के आगे हाजरी लगाना । यह दीपावली का अवसर था और वहाँ भीड़ भी पूरे शबाब पर थी । यहाँ पहाड़ तो थे नहीं फिर भी हमने 6 किमी. की पैदल दूरी तय करी ।
17. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (20 नवम्बर से 15 नवम्बर 2019)
इंडियन आर्मी चाहती थी की हेल रेस की टीम एक बार जैसलमेर आ जाये ताकि बाकी बची रेस की कार्यवाही पूरी हो सके । हम गये और जो काम पूरा करना था वो करके वापस आ गये । आजकल इधर सर्दी शुरू हो गयी है । हम लोग यहाँ गडीसर झील और प्रभु टी स्टाल आदि स्थानों पर घूमे । ट्रेकिंग कुछ नहीं हुई ।
18. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (13 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2019)
पिछली बार अगस्त में विराजे थे यहाँ तब गर्मी अपने चर्म पर थी और अब ठण्ड पूरे वेग पर थी । इस बार के आने का कारण था ‘द बोर्डर’ रेस । यह पैदल रोड रेस इंडो-पाक 1971 की याद में आयोजित की जाती है । अपुन ने वोलंटियरिंग करी इवेंट में । हमने भाग-भागकर धावकों का हौसला बढ़ाया व उन्हें खूब पानी पिलाया । रेस सफलता पूर्वक सम्पन्न हई और इस प्रकार हमारी भी विदाई हुई राजस्थान से । कुछ किमी, भागे थे और चले भी लेकिन उसका भी क्या लिखना ।
19. उदयपुर, राजस्थान (17 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2019)
जैसलमेर से लौटते हुए हमने दो दिन उदयपुर में बिताये । मैं यहाँ पहले भी आ चुका हूँ लेकिन तक साइकिल से आया था । पिछली बार से ज्यादा सुंदर लगी मुझे सिटी इस बार । एक बात मानने वाली है कि यहाँ का प्रशासन उदयपुर को साफ़ रखने में अहम भूमिका निभा रहा है । जहाँ नजर जा रही थी साफ़-सफाई के आलावा कुछ नहीं दिखा । हम लोग यहाँ पिचौला झील, बड़ी लेक, चेतक सर्किल और फतेहसागर झील घूमे ।
20. चंडीगढ़ (21 दिसम्बर से 22 दिसम्बर 2019)
यहाँ जाना हुआ चंडीगढ़ ट्राईसिटी मैराथन के चक्कर में, दोस्तों ने आयोजित करायी यह दौर जिसमें हम भी थोड़ी मदद के लिए पहुंचे । मैंने तो बस फोटो ही खींचने का काम किया बाकी प्रमुख काम तो धावकों के किया दौडकर ।
21. रोहतक, हरियाणा (22 दिसम्बर से 25 दिसम्बर 2019)
2019 का आखिरी शहर वो भी हमारे अपने ही राज्य से । यह विश्वास का गाँव है और चंडीगढ़ से आते हुए हम रोहतक रुके । लगातार ट्रेवलिंग के चक्कर में बाहर का खाना खा-खाकर हमने अपने पेट को डस्टबिन बना दिया था । इस कचरे को फिल्टर रोहतक में आकर किया जिसके लिए हमें लगातार दो गन्ने चूंगने पड़े । साफ हवा और साफ़ खान-पान ने हमारी बॉडी को जल्द ही सॉलिड बॉडी में परिवर्तित कर दिया ।
साल 2019 में ज्यादातर खर्चा हेल रेस ने उठाया, ट्रेक की सटीक दूरियां और ऊँचाइयों को नापने के लिए गर्मिन जीपीएस का इस्तेमाल किया गया । जीपीएस डिटेल्स मेरे स्टरावा अकाउंट से मिल सकती है । तो यह था सारा ब्यौरा इस साल का । बाकी सारी डिटेल्स नीचे टेबल से मिल जाएँगी । हैप्पी न्यू ईयर और मिलते हैं अगले साल ।
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Sandhan Valley, Sayhadri Mountain Range |
2018 खत्म भी नही हुआ था कि अपनी गाड़ी पहले ही नार्थ इंडिया को छोड़कर साउथ इंडियन में रवाना हो गयी । कुर्ग में अपना काम एक ट्रेल रेस के लिए रूट बनाने का था, मैं वहाँ के एक स्थायी रनर के साथ कुर्ग के आसपास के इलाके में खूब घूमा । हमने कर्नाटक की सबसे ऊँची चोटी जिसका नाम है तड़ीअंडा मोल पीक को समिट किया, जिसकी ऊँचाई 1748 मीटर रही । कॉफ़ी एस्टेट्स में घुमने के अलावा हमने चौमाकुंद चोटी, कब्बे मॉटे आदि छोटे पहाड़ों को भी चढ़ा । यहाँ 11 दिन रुककर मैंने 87.27 किमी. की ट्रेकिंग करी जिसमें 4660 मीटर का कुल एलेवेश्न गेन शामिल है ।
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Chomakund Peak |
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The Coffee beans |
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Mathigodo Elephant Camp |
2. सहाद्री पर्वत श्रृंखला, महाराष्ट्र (9 जनवरी 2019 से 23 फरवरी 2019)
लाइफ में पहली बार मैं सहाद्री पर्वत श्रृंखला में खड़ा था, यहाँ मैं खूब घूमा और लगभग 46 दिन उधर ही बिताये । यहाँ घूमते हुए अपुन महाराष्ट्र की सबसे ऊँची चोटी ‘कल्सुबाई’ कई बार चढ़ा, आगे फिर रतनगड किल्ला, अलंग-मदन-कुलंग का बेस, सांदन वैली, हरिश्चंद्रगड, कोंकण कड़ा, पाबरगड और भंडारदारा भी कई बार घूमना हुआ । इसके अलावा पुणे, मुंबई, शेंडी, अकोले, नासिक और इगतपुरी घूमना भी मजेदार अनुभव रहा । सहाद्री रेंज में रहते हुए अपुन ने टोटल 164 किमी. की पैदल ट्रेकिंग करी जिसमें 19542 मीटर का एलेवेश्न गेन हुआ ।
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India's own canyon "Sandhan Valley" |
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On the way to AMK trek |
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Kedareshwar Temple |
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The Famous Konkan Kada |
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Kalsubai Temle on Kalsubai Top |
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Towards Kulang ka khind |
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Practicing Climbing at Ratangad |
3. नाग टिब्बा, उत्तराखंड (24 फरवरी से 27 फरवरी 2019)
वेस्ट इंडिया से नार्थ इंडिया पहुंचते ही सीधा कूच किया गया विंटर ट्रेक के लिए । अब तक वंडरलास्टियों ने सोशल मिडिया को अपने काबू में कर लिया था, बार-बार लगातार बर्फ के फोटो डालकर । अपुन भी इस ‘फोटो-स्ट्राइक’ में आहुति डालने हेतु निकल पड़े नाग टिब्बा के लिए । गाड़ी से चलते हुए हम पांच लोग पहले ही दिन पन्त्वाडी पहुंचे जहाँ से चलते हुए हमने गोट विलेज से ऊपर कैम्पिंग करी और अगले दिन हममे से कुछ लोग झंडी टॉप तक गये तो कुछ सिर्फ नाग मंदिर तक । टोटल ट्रेकिंग 18 किमी. हुई 1005 मीटर के ओवेरल गेन के साथ ।
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Nag Temple |
4. भरमौर, हिमाचल प्रदेश (31 मार्च से 03 अप्रैल 2019)
नाग टिब्बे से वापस आकर कपड़े धोये ही थे कि भरमौर जाना पड़ा, उधर अरविन्द कार्टूनिस्ट जी पिछले कई महीनों से स्थापित थे । हम भी पहुंच गये उनसे मिलने, वहाँ अभी भी बर्फ थी और मौसम बेहद ही ठंडा था । हम भरमौर के बाद कुगती गाँव के लिए भी निकले लेकिन रास्ता ठीक न होने के कारण वापस आना पड़ा । रास्ते से मणिमहेश कैलाश के दर्शन करना यात्रा की बड़ी उपलब्धि रही । भरमौर से बीड पहुंचे वाया धर्मशाला, एक रात बीड में बिताकर हमने 3 अप्रैल को जिला फरीदाबाद वापसी करी । इस ट्रिप पर कोई ट्रेकिंग नहीं करी, बस गाड़ी में अरे-परे घूमते रहे ।
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Manimahesh Kailash |
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Manimahesh Kailash |
तत्काल में ट्रेन के टिकेट बुक हुए और पहुंच गये रिम्बिक जोकि वेस्ट बंगाल का हिस्सा है । यहाँ मैं सात दिन रहा और आसपास के इलाके में घूमता रहा । यहाँ रहते हुए फेमस संदकफू, फालूट, मानेभंजन आदि जगहों के साथ-साथ एक नेपाली शादी अटेंड करने का सुनहरा मौका भी मिला । मैं मदिरापान तो नहीं करता लेकिन शादी में बुरांश की शराब को जूस समझने की भूल के कारण एक घंटे तक बावला होकर जरुर फिरता रहा । इधर 66.7 किमी. का ट्रेक किया जिसमें 6750 मीटर का टोटल एलेवेश्न गेन हुआ ।
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Nepali wedding at Nepal |
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The Epic Sleeping Buddha |
6. बीड-बिलिंग, हिमाचल प्रदेश (19 अप्रैल से 21 अप्रैल 2019)
बीड में होने वाली एक रोड रेस के लिए मुझे हिमाचल वापस आना पड़ा रिम्बिक को छोड़कर । यहाँ बीड, लैंडिंग साईट, बिलिंग, शेराबिलिंग मोनस्ट्री आदि घूमने के बाद वापसी आना हुआ । यहाँ सिर्फ 7 किमी. ही ट्रेक किया जिसमें मात्र 150 मीटर का गेन हुआ ।
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Paragliding Experience With Dhauladhar Mountain Range |
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Mighty Dhauladhar Seen From Chaugan |
7. संदकफू, वेस्ट बंगाल (03 मई से 15 मई 2019)
एक बार फिर से हम रिम्बिक की धरती पर खड़े थे, इधर न्यू जलपाई गुडी में उतरते ही टेक्सी वाले बिल्कुल दिल्ली के ऑटो वाला व्यवहार करते हैं, मतलब ट्रेन से उतरने से पहले ही आपको कैप्चर कर लेंगे । खैर न्यू जलपाई गुडी से दार्जिंलिंग पहुंचे सूमो से फिर एक और टैक्सी से रिम्बिक । कुछ 12 दिन यहाँ बिताये जिसमें फिर से संदकफू और फालूट घूमना हुआ । इस जगह को मैं बहुत याद करता हूँ, यहाँ के लोग शिक्षित हैं इसलिए पर्यावरण और प्लास्टिक का खूब ख्याल रखते हैं, जगह-जगह डस्टबिन स्थापित किये गये हैं । तो यहाँ 68.7 किमी. की ट्रेकिंग करी 8714 मीटर के एलेवेश्न गेन के साथ ।
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Shingalila Mountain Range |
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Phalut (Forest Hut) |
8. सांगला-छितकुल और जीभी, हिमाचल प्रदेश (17 मई से 01 जून 2019)
ये 15 दिन हमेशा याद रहेंगे, इन दिनों अपुन ने कुछ नहीं किया । सुबह देर से उठना और दो-एक किमी. का ट्रैक बस यही दिनचर्या रही 15 दिन की । जहाँ दिल्ली एन.सी.आर. 47-48 डिग्री में तप रहा था वहीँ हिमाचल ने कलेजे में ठंडक पहुंचाई । पहले तो मैं सांगला रुका जहाँ, कामरू किला, बेरिंग मंदिर, आजाद कश्मीर, और ट्राउट फिश फॉर्म घूमा, फिर अलगे कुछ दिन छितकुल में बिताये जहाँ रोज सवेरे बास्पा नदी के किनारे जाकर बैठना हमेशा याद रहेगा । कमरे के पीछे ही चारंग ला था दीवार के माफिक, अपुन रोज देखता और बोलता कि एक दिन जरुर आयेगा तेरे पास । ऐसा ही एक वादा सांगला में लिया गया “कि इधर पैदल आयेगा रुपिन पास होते हुए” । यहाँ से निकलकर सीधा आनी और फिर जीभी में कई दिन बिताये । चेह्णी कोठी को पहली बार सामने देखकर बहुत सुकून मिला । इस ट्रिप पर मात्र 30 किमी. की ट्रैकिंग हुई जिसमें 3575 मीटर का गेन हुआ ।
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Buddhist Temple, Sangla Valley |
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Kamru Fort, Sangla |
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Chehni Kothi |
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Chhitkul village |
9. मनाली-लेह (14 जून से 26 जून 2019)
यह हेल रेस का सालाना रोड रनिंग इवेंट था जिसमें कुछ धावक मनाली मॉल रोड से लेह स्थित शांति स्तूप तक भागे । धावकों ने 480 किमी. की दूरी को तय समय जोकि 120 घंटे था से पूरे 7 घंटे पहले पूरा कर लिया । इस इवेंट के दौरान हमने कुछ दिन सोलंग घाटी में बिताये, बाकी मनाली-लेह हाईवे पर । इस हाईवे के बारें में क्या बताना सब तो जानते ही हो आप लोग । फिर भी इस इवेंट के दौरान रोहतांग पास, बारालाच्च्ला, गाटा लूप्स, नकी ला, लाचुंग ला, मौरे प्लेन्स और तांगलंग ला और शांति स्तूप घूमने का अवसर मिला । इधर अपन टोटल 21 किमी. चला, गेन कितना हुआ कोई आईडिया नहीं है । सारे गेजेट बंद थे इसलिए कोई रिकॉर्डिंग नहीं हुई ।
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Deepak Tal |
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Morey Plains |
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Sissu Waterfall |
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Truck Accident On Rohtang Pass |
10. भृगु लेक, हिमाचल प्रदेश (20 जुलाई से 20 जुलाई 2019)
यह एक तेज प्रयास था भृगु झील जाने का । कई दिनों से लगातार होती बारिश ने इस ट्रिप को बहुत ही बेरंग सा कर दिया था । मुझे लग रहा था कि अगर ऐसे ही मौसम बना रहा तो लाइफ में पहली बार भृगु जाना कैंसल हो सकता है लेकिन शुक्र था कि एक दिन धूप निकली । बस पैरों में बूट पहनकर शूटम-शूट भृगु झील गये और उसी दिन वापस नीचे भी आ गये । तो 42 किमी. का ट्रेक हुआ टोटल मिलाकर जिसमें 5023 मीटर का कुल गेन हुआ । पूरा ब्लॉग पढने के लिए यहाँ क्लिक करें ।
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Bhrigu Lake |
11. सर पास व पिन पार्वती पास, हिमाचल प्रदेश (24 जुलाई से 04 अगस्त 2019)
साल 2019 का सबसे रोमांचक ट्रेक था यह, वैसे से मैंने पहले भी एक अटेम्प्ट किया था पिन पार्वती पास का लेकिन कामयाब नहीं हो पाया । इस दूसरे प्रयास में सर पास तक हम तीन लोग थे और पिन पार्वती पास मिशन के लिए सिर्फ दो । मैंने और नवीन ने जवानी के जोश में अकेले ही पार्वती से पिन वैली को पैदल ही नाप डाला । वैसे तो ये दोनों ही घाटियाँ रोमांच और खतरों से भरी पड़ी हैं फिर भी हम जैसे-तैसे कामयाब हो ही गये । नोट : इस ट्रेक पर अकेले जाना लगभग नामुमकिन है । टोटल ट्रेक की दूरी 121 किमी. रही जिसमें 7882 मीटर का एलेवेश्न गेन हुआ । फेल्ड अटेम्प्ट यहाँ पढ़े व सफल अटेम्प्ट यहाँ पढ़े ।
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Towards Sar Pass |
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Just Before Pin Parvati Pass |
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Pin Parvati Pass |
12. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (26 अगस्त से 31 अगस्त 2019)
अगस्त का महिना था फरीदाबाद जल रहा था और राजस्थान जाना गर्म तवे पर चलने जैसा था । पहले हम जोधपुर गये जहाँ से जैसलमेर और फिर लौंगेवाला में एक भयानक रात बिताकर वापसी हुई । हेल रेस के इवेंट के चलते हमारा जाना हुआ, जैसलमेर तक सब ठीक था लेकिन लौंगेवाला में आर्मी गेस्ट हाउस में रात इतनी गर्म थी जिसका सबूत वो अंडरवियर दे सकता है जिससे लगातार 10 बार पसीनों को निचौडा गया । यहाँ कोई ट्रेकिंग नहीं हुई, अगर होती तो हमें भी शहीद की उपाधि मिलना तय था ।
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Jaisalmer Fort |
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Indira Gandhi Canal |
13. त्रियुंड हिल, हिमाचल प्रदेश (18 सितम्बर से 19 सितम्बर 2019)
फरीदाबाद के कारखाने जल थे, पूरे जिले का वातावरण लूमय था । मौका मिलते ही मैं और विश्वास हिमाचल निकल गये जहाँ हमने त्रियुंड ट्रेक किया । मौसम साफ था और यह ऐसा ट्रेक है कि त्रियुंड पहुंचते ही धौलाधार एकदम सामने दिखती है, इतनी सामने की बात कर लो उससे । ट्रेक की सफलता में हमने तय किया कि बीड चलते हैं और हनुमानगढ़ पीक को समिट करते हैं । त्रियुंड ट्रेक पर 8.69 किमी. का ट्रेक हुआ विद 973 मीटर गेन । पूरा एडवेंचर यहाँ पढ़ें ।
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Triund Trek |
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Triund Trek |
14. हनुमानगढ़ पीक, हिमाचल प्रदेश (19 सितम्बर से 21 सितम्बर 2019)
यहाँ एक दोस्त रहता है प्रत्युष नाम से, उसी के पास रुके । एक रात बिताकर अगले दिन हम तीन हलकी सर्दी के बीच निकल गये अति कम फेमस पीक के लिए । हमने बीड स्थित ‘गाँव बाड़ी’ से पैदल जाना तय किया । पूरा रास्ता एक प्रकार से टेक्निकल श्रेणी में रखा जा सकता है, रास्ते पर जौंख थी, कीचड़ और फिसलन के साथ-साथ धुंध, ओले और तेज बारिश ने हमारी देहि तोड़ डाली । ऊपर पहुंचकर खराब मौसम मिला इसलिए हमने नजारे के नाम पर बस एक ही शब्द सूझा “भागो” । टोटल 11.56 मीटर ट्रेकिंग हुई जिसमें 1604 मीटर का कुल एलेवेश्न गेन हुआ । पूरा ब्लॉग यहाँ है ।
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One Of My Favorite Trek "Hanumangarh Peak" |
15. सोलंग घाटी, हिमाचल प्रदेश (22 सितम्बर से 08 अक्टूबर 2019)
हेल रेस का एक और इवेंट था, सोलंग सकईअल्ट्रा । इस बार भी अपुन उधर था हेल्प के लिए । इधर हमने लगातार कई दिनों तक बारिश के बीच रूट को मार्क किया और हर रोज ही बारिश ने हमारी मेहनत को धो डाला । इस इवेंट के दौरान मनाली, हिडिम्बा मन्दिर, सोलंग वैली, अंजनी महादेव, बक्करथाच, वशिष्ठ मंदिर, गुलाबा आदि जगहें घूमने को मिली । 16 दिनों में यहाँ 84.19 किमी. की ट्रेकिंग करी जिसमें 6417 मीटर का टोटल गेन हुआ ।
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Solang Valley |
16. काशी विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश (11 नवम्बर से 14 नवम्बर 2019)
काफी समय से माँ बोले जा रही थी कि “काशी घूमा ला, काशी घुमा ला”, तो आखिर एक दिन अपन ने काशी के नाम का कफन बाँध ही लिया । तत्काल में टिकट बुक करे और मम्मी-पापा को संग लेकर निकल पड़े बनारस । उधर ट्रेन से उतरकर सबसे पहला काम जो किया वो था कमरा लेना । बाद में गंगा में स्नान करके अगला मुख्य काम था भगवान विश्वनाथ के आगे हाजरी लगाना । यह दीपावली का अवसर था और वहाँ भीड़ भी पूरे शबाब पर थी । यहाँ पहाड़ तो थे नहीं फिर भी हमने 6 किमी. की पैदल दूरी तय करी ।
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Kashi |
17. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (20 नवम्बर से 15 नवम्बर 2019)
इंडियन आर्मी चाहती थी की हेल रेस की टीम एक बार जैसलमेर आ जाये ताकि बाकी बची रेस की कार्यवाही पूरी हो सके । हम गये और जो काम पूरा करना था वो करके वापस आ गये । आजकल इधर सर्दी शुरू हो गयी है । हम लोग यहाँ गडीसर झील और प्रभु टी स्टाल आदि स्थानों पर घूमे । ट्रेकिंग कुछ नहीं हुई ।
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At Prabhu Tea Stall, Jaisalmer |
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Gadisar Lake |
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Gadisar Lake |
18. जैसलमेर-लौंगेवाला, राजस्थान (13 दिसम्बर से 17 दिसम्बर 2019)
पिछली बार अगस्त में विराजे थे यहाँ तब गर्मी अपने चर्म पर थी और अब ठण्ड पूरे वेग पर थी । इस बार के आने का कारण था ‘द बोर्डर’ रेस । यह पैदल रोड रेस इंडो-पाक 1971 की याद में आयोजित की जाती है । अपुन ने वोलंटियरिंग करी इवेंट में । हमने भाग-भागकर धावकों का हौसला बढ़ाया व उन्हें खूब पानी पिलाया । रेस सफलता पूर्वक सम्पन्न हई और इस प्रकार हमारी भी विदाई हुई राजस्थान से । कुछ किमी, भागे थे और चले भी लेकिन उसका भी क्या लिखना ।
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Prabhu Tea Stall, Jaisalmer Hanuman Chawk |
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Himmatgarh Palace, Jaisalmer |
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Laungewala War Memorial |
19. उदयपुर, राजस्थान (17 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2019)
जैसलमेर से लौटते हुए हमने दो दिन उदयपुर में बिताये । मैं यहाँ पहले भी आ चुका हूँ लेकिन तक साइकिल से आया था । पिछली बार से ज्यादा सुंदर लगी मुझे सिटी इस बार । एक बात मानने वाली है कि यहाँ का प्रशासन उदयपुर को साफ़ रखने में अहम भूमिका निभा रहा है । जहाँ नजर जा रही थी साफ़-सफाई के आलावा कुछ नहीं दिखा । हम लोग यहाँ पिचौला झील, बड़ी लेक, चेतक सर्किल और फतेहसागर झील घूमे ।
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Pichhola Lake |
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City Palace, Udaipur |
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Udaipur |
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Fateh Sagar Lake |
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Panorama of Pichhola Lake and Surroundings |
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Badi Lake |
20. चंडीगढ़ (21 दिसम्बर से 22 दिसम्बर 2019)
यहाँ जाना हुआ चंडीगढ़ ट्राईसिटी मैराथन के चक्कर में, दोस्तों ने आयोजित करायी यह दौर जिसमें हम भी थोड़ी मदद के लिए पहुंचे । मैंने तो बस फोटो ही खींचने का काम किया बाकी प्रमुख काम तो धावकों के किया दौडकर ।
21. रोहतक, हरियाणा (22 दिसम्बर से 25 दिसम्बर 2019)
2019 का आखिरी शहर वो भी हमारे अपने ही राज्य से । यह विश्वास का गाँव है और चंडीगढ़ से आते हुए हम रोहतक रुके । लगातार ट्रेवलिंग के चक्कर में बाहर का खाना खा-खाकर हमने अपने पेट को डस्टबिन बना दिया था । इस कचरे को फिल्टर रोहतक में आकर किया जिसके लिए हमें लगातार दो गन्ने चूंगने पड़े । साफ हवा और साफ़ खान-पान ने हमारी बॉडी को जल्द ही सॉलिड बॉडी में परिवर्तित कर दिया ।
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Akhada |
साल 2019 में ज्यादातर खर्चा हेल रेस ने उठाया, ट्रेक की सटीक दूरियां और ऊँचाइयों को नापने के लिए गर्मिन जीपीएस का इस्तेमाल किया गया । जीपीएस डिटेल्स मेरे स्टरावा अकाउंट से मिल सकती है । तो यह था सारा ब्यौरा इस साल का । बाकी सारी डिटेल्स नीचे टेबल से मिल जाएँगी । हैप्पी न्यू ईयर और मिलते हैं अगले साल ।
सर ये ब्लॉग पढ़ने के बाद आप परधान मंतरी जी द्वारा फिट इंडिया मूवमेंट के ब्रैंड अम्बेसडर घोषित किए जाते हैं।
ReplyDeleteहम बस अपने परधान मंतरी जी के कहे अनुसार चल रहे हैं, याद है सर ने 21 जगह घुमने की सलाह दी थी
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