Wednesday, March 15, 2017

बद्रीनाथ का भूत, भाग-2 (Ghost of Badrinath, Part-2)

पिछली रात सोने से पहले की गई बैठक के अनुसार हमनें सुबह 5 बजे उठकर तेज-तर्रार तरीके से फ्रेश होकर साढ़े पांच बजे होटल छोड़ा । सबकुछ ठीक था लेकिन इतनी सुबह कौन उठता है वो भी सुबह के 5 बजे, प्रेशर तो किसी को आया नहीं बस मुंह-धोकर सभी गाड़ी में लध गये । बाहर ठंडी हवा कहर ढा रही थी और भीतर बिना फ्रेश हुए 4 फरिश्ते नाक के बाल जला रहे थे । आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है और यहाँ यह कहावत सिद्ध हो गयी जब चारों ने अपनी-2 जान बचाने के लिए ओस से ढंके शीशे नीचे कर लिये ।

Saturday, March 11, 2017

बद्रीनाथ का भूत, भाग-1 (Ghost of Badrinath, Part-1)

लोग कहते हैं कि किसी भी यात्रा पर जाने लिए वहां से बुलावा आना जरुरी है नहीं तो आप वहां जा ही नहीं सकते । बुलावे-वुलावे का तो पता नहीं हाँ लेकिन इतना जरुर पता था कि लगातार आती तीन छुट्टियाँ को मेरे दोस्त यूँ ही बर्बाद नहीं करना चाहते थे । उनके चेहरे की ख़ुशी देखकर ऐसा लगता जैसे इन तीन दिनों में दोनों को मोक्ष मिल जायेगा और शायद साथ में मुझे भी । वो अपनी बातों में डूबकर इतना उत्साह दिखाते अगर उस वक्त उन्हें कोमन्वेल्थ गेम्स में भाग लेते एथलीटस भी देख ले तो 2 गोल्ड पक्के कर लें ।